Surya Namaskar Vyayam

क्या हैं 12 सूर्य नमस्कार, यह संपूर्ण, जरूरी आसन क्यों हैं | What is best Surya Namaskar Vyayam & why it’s need

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3 सूर्य नमस्कार कैसे किया जाता है (12 Poses of Surya namaskar vyayam )
3.2 What is the benefits of Surya Namaskar yoga?

क्या होता है सूर्य नमस्कार | सूर्य नमस्कार कब करना चाहिए | How many Surya Namaskar Vyayam a day?

Surya namaskar vyayam का श्रोत काल पूर्व वैदिक काल (2700 ईसा पूर्व) को माना जाता है।
मुख्यतः इसका उद्देश्य शरीर को स्वस्थ रखने के लिए,
विभिन्न 12 प्रकार के आसनों के माध्यम से भगवान सूर्य को नमस्कार करना है।
सूर्य नमस्कार समस्त योगासनों में सर्वश्रेष्ठ आसन है।
सूर्य नमस्कार सभी उम्र के लोगों के लिये12 मुद्राओं में करने वाला सबसे सरल योगासन है।
इसके अनवरत अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर उर्जावान होता है। इन मुद्राओं में शरीर के सभी अंगों को संचालित कर सूर्य देवता को प्रशन्न किया जाता है। इन मुद्राओं को करते समय क्रमशः संस्कृत भाषा के 12 मंत्रोंच्चार किए जाते हैं ।

सूर्य नमस्कार करने का सही समय क्या है ( Best Time of Surya namaskar vyayam And How Many Time In A Day )

वेद शास्त्रों में ऋषि मुनियों के कथनानुसार सूर्य नमस्कार को,
प्रात: काल ब्रह्म मुहूर्त में सूर्योदय के पूर्व 4:30 am से 5:30 am के मध्य करना चाहिए।
सायं काल में सूर्यास्त के कुछ समय पूर्व सूर्य नमस्कार करने की बात कही गई है।

surya namaskar in hindi

सूर्य नमस्कार का उद्देश्य भगवान सूर्य को धरती लोग में आगमन पर और उनके गमन पर नमन करना है।
सूर्य नमस्कार की खोज और उसका उद्देश्य,
आध्यात्मिक रूप में साक्षात दर्शन देने वाले भगवान सूर्य को नमन करना।
और विभिन्न आसनों के माध्यम से नमस्कार करने का उद्देश्य,
सूर्य की कांति के समक्ष शारीरिक ऊर्जा ग्रहण करना है।
हिंदू धर्म में सूर्य नमस्कार को बहुत महत्वपूर्ण और संपूर्ण आसन होने पर बल दिया गया है।
अब संपूर्ण विश्व में सूर्य नमस्कार को महत्व दिया जाने लगा है।

सूर्य नमस्कार कैसे किया जाता है (12 Poses of Surya namaskar vyayam )

hindisaphar मे बताया गया है कि सूर्य नमस्कार कैसे करना चाहिये? कब करना चाहिये? उचित समय इन आसनों को करने का क्या होता है? यहां पर छोटे से छोटे विषय पर भी ध्यान दिया गया है, कि सभी प्रकार की जानकारी दी जा सके।

surya namaskar in hindi | surya namaskar 12 steps |surya namaskar yoga

  • Surya namaskar vyayam प्रणाम आसन|
  • Surya namaskar vyayam हस्तउत्तानासन
  • Surya namaskar vyayam हस्तपाद या पश्चिमोत्तनासन आसन
  • Surya namaskar vyayam अश्व आसन
  • Surya namaskar vyayam दंडासन
  • Surya namaskar vyayam अष्टांग नमस्कार
  • Surya namaskar vyayam भुजंगासन
  • Surya namaskar vyayam पर्वत आसन
  • Surya namaskar vyayam अश्व संचालन
  • Surya namaskar vyayam हस्तोत्तानासन
  • Surya namaskar vyayam हस्तोत्पादासन
  • Surya namaskar vyayam ताड़ासन

What is the benefits of Surya Namaskar yoga?

surya namaskar asana vyayam कितने प्रकार के होते हैं?, सूर्य नमस्कार करने से क्या-क्या लाभ होते हैं? जिनका विवरण निम्न लिखित है।

Surya namaskar vyayam प्रणाम आसन करने का तरीका

इस आसन के तहत आराम से सीधे खड़े हो जाएं।
और अपने हांथ की हथेलियों को आगे की तरफ जोड़ लें, गहरी सांस लें।
और कंधों को ढीला रखें। अब सांस अंदर लेते हुए अपने हाथ ऊपर करें,
और स्वास को बाहर निकालते हुए प्रणाम मुद्रा धारण करें।

Surya namaskar vyayam के इस आसन से फायदा-

शरीर को आराम मिलता है।
और एकाग्रता की भावना पैदा होती है। मन संतुलित होता है।

Surya namaskar vyayam हस्तउत्तानासन करने का तरीका

इस आसन में सांस अंदर लेते हुए हाथों को ऊपर किया जाता है ।
और हाथों को कानों से सटाकर रखा जाता है।
इस आसन करते समय समस्त शरीर को ऊपर की और उटाया जाता है।

Surya namaskar vyayam हस्तउत्तानासन से फायदा-

कंधों के दर्द में आराम, निचले हिस्से पेट, पेडू की नशों में खून का संचार, छाती में हवा का संचार गर्दन लचीली होती है।

Surya namaskar vyayam हस्तपाद या पश्चिमोत्तनासन आसन करने की विधि


इस चरण में आगे की ओर झुकते हैं, दोनों पैर पिंडुलियां सीधी रखना होता है।
और सांस अंदर भरते हुए,
दोनों हाथों को पैरों के पंजो के आगे जमीन पर रखना होता है ।

Surya namaskar vyayam हस्तपाद आसन करने से लाभ


शरीर में लचीलापन आता है, ग्लैंड्स उत्तेजित होता है,
मंदाग्नि तेज होकर पाचन क्रिया में बढावा मिलता है

Surya namaskar vyayam अश्व आसन करने का तरीका


इस आसन को करते समय दाहिना पैर पीछे किया जाता है, इस पैर के घुटने को जमीन पर रखना होता हैं।
साथ में ही चेहरे को ऊपर की ओर करते हुए आसमान देखना होता है।

Surya namaskar vyayam अश्व आसन करने से फायदा

घुटने चलायमान होते हैं। कमर गर्दन और टखने को मजबूत कर मोच आदि का खतरा कम होता है।
गुर्दे और यकृत में खून का संचार बढा़ता है।

Surya namaskar vyayam दंडासन करने की विधि


इस आसन को करने में बाएँ पैर को पीछे की ओर किया जाता है,
शरीर सीधी रेखा का आकार धारण कर लेता है ।

Surya namaskar vyayam दंडासन करने से फायदा

मांसपेशियों, तंत्रिकाओं और रीढ़ की हड्डी को लचकदार बनाते हुए मजबूती प्रदान करने मे सहायक है।
मस्तिष्क की कोशिकाओं को शांत और स्थिर करने में कारगर होता है।

Surya namaskar vyayam अष्टांग नमस्कार करने की विधि

जमीन मे नीचे की ओर मुंह रखते हुए उल्टा लेटना होता है,
और आराम से कूल्हों को ऊपर की तरफ उठाया जाता है।
याद रहे कि आसन के दौरान सीना और ठुड्डी जमीन में छुई रहनी चाहिए।

Surya namaskar vyayam अष्टांग नमस्कार करने से लाभ

दिल के लिए लाभदायक, उच्च और निम्न दोनों रक्त चाप को सही करने में फायदेमंद।

Surya namaskar vyayam भुजंगासन करने की विधि

क्या हैं 12 सूर्य नमस्कार, यह संपूर्ण, जरूरी आसन क्यों हैं | What is best Surya Namaskar Vyayam & why it's need

इस आसन के दौरान कमर के ऊपर का हिस्सा उठा रहता है,
और बांकी हिस्सा जमीन में बिछा रहता है।
साथ में ही ऊपर की ओर देखा जाता है।
अपने शरीर को हाथों की मदद से कमर को तोड़कर उपर के हिस्से को ऊपर उठाया जाता है।

Surya namaskar vyayam भुजंगासन करने से लाभ

शरीर में लचीलापन लाए, पाचन को सुधारे, हाथों और कंधों को मजबूत करे

Surya namaskar vyayam पर्वत आसन करने की विधि

 Surya Namaskar Vyayam

इस आसन को करने के दौरान केवल हांथ और पैर ही जमीन पर रखे होते हैं,
सिर नींचे की ओर झुका होता है।
और शरीर का बांकी हिंस्सा ऊपर उठा होता है।
इस आसन करते वख्त पूरे शरीर का वजन दोनों हाथों और पैरों पर पड़ता है।

Surya namaskar vyayam पर्वतासन करने से लाभ

जंघों, पैरों के घुटनों, और दोनों एड़ियों को मजबूती प्रदान करता है। करता है।
शरीर के सभी अंगों मे रक्त संचरण में इजाफा करता है।

Surya namaskar vyayam अश्व संचालन करने की विधि

ये आसन भी अश्व आसन की तरह ही किया जाता है।
परंतु इसमें भागने वाली मुद्रा का रूप धारण किया जाता है

Surya namaskar vyayam अश्व संचालन करने से लाभ।

घुटने, टखने, गुर्दे और यकृत की नशों के लिए लाभदायक

Surya namaskar vyayam हस्तोत्तानासन करने का तरीका

इस आसन में सांस बाहर छोड़ते हुए हाथों को ऊपर किया जाता है ।
और हाथों को कानों से सटाकर रखा जाता है।

इस आसन में सांस बाहर छोड़ते हुए हाथों को ऊपर किया जाता है ।
और हाथों को कानों से सटाकर रखा जाता है।
रखा जाता है,
Surya namaskar vyayam के 12 आसनों मे यह भी बहुत महत्वपूर्ण है।

इस आसन करते वख्त समस्त शरीर को ऊपर की और उठाना होता है।

Surya namaskar vyayam हस्तोत्तानासन से फायदा-

कंधों के दर्द में आराम, निचले हिस्से पेट, पेडू की नशों में खून का संचार, छाती में हवा का संचार और गर्दन लचीली होती है।

Surya namaskar vyayam हस्तोत्पाद करने की विधि

इस चरण में आगे की ओर झुकते हैं, दोनों पैर पिंडुलियां सीधी रखना होता है।
और सांसबाहर छोड़ते हुए,
दोनों हाथों को पैरों के पंजो के आगे जमीन पर रखना होता है।

Surya namaskar vyayam हस्तोत्पाद आसन करने से लाभ

शरीर में लचीलापन आता है, ग्लैंड्स उत्तेजित होता है,
मंदाग्नि तेज होकर पाचन क्रिया में बढावा मिलता है

Surya namaskar vyayam ताड़ासन करने की विधि

ये सूर्य नमस्कार आसन का अंतिम चरण होता है और इसमें एक दम सीधे दोनों पैरों को जोड़कर खड़े होते हैं।
और शरीर को आराम देते हुए दोनो हांथ उपर की ओर कर दोनो हथेलियों को जोड़ना है ।

Surya namaskar vyayam ताड़ासन करने से लाभ

पाचन, तंत्रिकाओं और श्वसन तंत्र के लिए आश्चर्यजनक लाभ होता है।

सूर्य नमस्कार मंत्र | releted mantra of Surya Namaskar vyayam | surya namaskar mein kitne mantra hote hain |

बारह अनन्य प्रकार के संस्कृत के वेदमंत्रों से भगवान सूर्य की उपासना की जाती है।
और उनके सम्मान के बाबत धरती लोग में साक्षात दर्शन देने वाले प्रमुख देव मानते हुए,
सूर्य नमस्कार के विभिन्न आसनों के द्वारा उनको प्रसन्न किया जाता है।
वस्तुतः यह 12 प्रकार के संस्कृत में बोले जाने वाले भगवान सूर्य के उपासनार्थ सूर्य नमस्कार के समयसूर्य नमस्कार के बारह स्थितियों या चरणों में इन बारह मंत्रों का उचारण किया जाता है।
सबसे पहले सूर्य नमस्कार करने के पूर्व सूर्य के सम्मान में विभिन्न नाम उच्चारण,
तत्पश्चात प्रार्थी भाव से सूर्य नमस्कार योगसमाप्ति का महत्व श्लोक के माध्यम से बताते हैं ।

सूर्य नमस्कार मंत्र का महत्व | संस्कृत श्लोक | Surya namaskar vyayam mantra in s hindi

ॐ ध्येयः सदा सवितृ-मण्डल-मध्यवर्ती, नारायण: सरसिजासन-सन्निविष्टः।
केयूरवान् मकरकुण्डलवान् किरीटि, हारी हिरण्मयवपुर्धृतशंखचक्रः ॥

अर्थात बृह्मांड के मध्यवर्ती भाग में , कमल आसन पर विराजमान ,
सोने के आभूषणों से सुसज्जित तथा सुवर्ण काटी के शंख और चक्र धारण करने वाले भगवान श्री नारायण का ध्यान करना चाहिये।

surya namaskar mantra | सूर्य नमस्कार मंत्र बीज

क्रम संख्यानमस्कार मंत्रबीज मंत्र
1ॐ मित्राय नमः।ॐ ह्रां
2ॐ रवये नमः।ॐ ह्रीं
3ॐ सूर्याय नमः।ॐ ह्रूं
4ॐ भानवे नमः।ॐ ह्रैं
5ॐ खगाय नमः।ॐ ह्रौं
6ॐ पूष्णे नमः।ॐ ह्रः
7ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।ॐ ह्रां
8ॐ मरीचये नमः।ॐ ह्रें
9ॐ आदित्याय नमः।ॐ ह्रूं
10ॐ सवित्रे नमः।ॐ ह्रैं
11ॐ अर्काय नमः।ॐ ह्रौं
12ॐ भास्कराय नमः। ॐ ह्रः

‎सूर्य नमस्कार मंत्र, ‎आसन, ‎सूर्यनमस्कार के आसन, by hindisaphar

आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने।
आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥

जो लोग नियमबद्ध रूप से सूर्य नमस्कार करते हैं, वो लोग शारीरिक बलिष्टता व मांसिक शांति के भागीदार होते हैं।उनकी उम्र, बुद्धि-विवेक, बल, शौर्य और तेज की बढ़ोत्तरी होती है।

सूर्य नमस्कार का महत्व एवं लाभ। सूर्य नमस्कार के फायदे | Health Benefits Of Surya Namaskar vyayam

सूर्य नमस्कार के महत्व एवं लाभ के विषय पर भिन्न-भिन्न बातें चर्चा में रहतीं हैं उनमे कुछ प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं। Surya Namaskar vyayam की विष्लेशण किया जाय तो यह निचोड़ निकल कर आता है कि सूर्य नमस्कार केवल अकेला ऐसा योग है जो अपने आप मे संपूर्ण आसन है।

सूर्य नमस्कार मासिक धर्म के लिए लाभदायक | Regular Menstrual Cycle with Surya Namaskar vyayame

संतुलित आहार और अनन्य योग भी सूर्य नमस्कार नामक वरदान के सामने फीके साबित हुए हैं।
Surya Namaskar vyayam से दैनिक जरूरत अनुसार 20000 कैलोरी ऊर्जा की भरपाई होती है।और शरीर में बनने वाला अनायास मोटापा भी कम होता जाता है।

महिलाओं के लिए सूर्य नमस्कार एक वरदान साबित हुआ है।
सूर्य नमस्कार योगासन करने से थायराइड इत्यादि ग्रंथियां मजबूत होती हैं।

सूर्य नमस्कार से क्या लाभ होते हैं?

सूर्य नमस्कार का नियमित अभ्यास महिलाओं के मासिक धर्म के समय होने वाली पीड़ा को भी ठीक करता है व बेसमय होने वाले मासिक धर्म को नियमितता प्रदान करता है।
और शरीर में इलास्टिसिटी पैदा करता है,
इसलिए सूर्य नमस्कार योनि, एवं पेड़ू में असहनीय पीड़ा को कम करता है।
महिलाओं को प्रसव के पूर्व होने वाले त्वचा व योनि संबंधी रोगों को ठीक करता है।
प्रसव के समय भी दर्द का अहसास कम होता है।
और शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा और इस स्फूर्ति प्रदान करते हुए,
चेहरे पर निखार वापस लाने में मदद करता है।
झुर्रियों को आने से रोकता है। और शरीर की त्वचा को तरोताजा बनाए रखता है।

मांसपेशियों, जोड़ों को सूर्य नमस्कार मजबूत करता है (Surya Namaskar vyayam growing strength & helps Joints)

विभिन्न प्रकार के बारह आसन सूर्य नमस्कार में किए जाते हैं ।
जिनके कारण शरीर की सभी तंत्रिकाओं, आंतों, मांसपेशियों और जोड़ों को मजबूती एवं याद्दास्त प्रखर होती है।
इनके अलावा गर्दन, हांथ और पैर, रीढ़ की हड्डी भी मजबूत हो जाते हैं।

त्वचा मे निखार लाए सूर्य नमस्कार | Gives Glowing Skin with Surya Namaskar vyayam

सूर्य नमस्कार खून को साफ करते हुए त्वचा संबंधित विभिन्न समस्याओं व बीमारियों से शरीर की रक्षा करता है।
काले धब्बे झुर्रियां रूखापन ठीक होने लगता है चेहरे और शरीर की त्वचा में चमक आ जाती है।
विभिन्न प्ररकार के इंफेक्शन खाज खुजली इत्यादि में भी कमी आने लगती है।
बालों को झड़ने से रोकने हेतु सूर्य नमस्कार सबसे उत्तम योगासन है।
और अनवरत योगा करने से बाल काले होते हैं।
शरीर में चुस्ती फुर्ती बनी रहती है शरीर के विषाक्त पदार्थ समय समय से बाहर निकलते रहते हैं।
यह आसन मुख्य रूप से वृद्धों को बहुत फायदेमंद साबित होता है।

बच्चो को सूर्य नमस्कार क्यों करना चाहिए? | Why Should Children Do Surya Namaskar vyayam ?

सूर्य नमस्कार मन में शांति प्रदान करता है।
और एकाग्रता को बढ़ाता है।
आजकल बच्चे महती प्रतिस्पर्धा का सामना करते है।
इसलिए उन्हे नित्यप्रति सूर्य नमस्कार करना चाहिए।
क्योंकि इससे उनकी सहनशक्ति बढ़ती है।
और परीक्षा के समय होने वाली चिंता और नींद ना आने की समस्या से निजात मिलता है।

क्या सूर्य नमस्कार पूर्ण व्यायाम है? | Surya Namaskar vyayam Is good and perfect ?

सूर्य नमस्कार के रोजाना अभ्यास से शरीर में स्फूर्ति मैं वृद्धि,
और मन संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
यह शरीर की समस्त मांसपेशियों को रक्तप्रवाहित कर मजबूत करता है।
खिलाड़ियों के मेरुदण्ड और अंगो के लचीलेपन को बढाता है।
Surya Namaskar vyayam योगाचार्यों के परामर्श उपरांत 5 वर्ष के ऊपर के बच्चे,
नवजवान,और बूढे भी नियमित सूर्य नमस्कार करना प्रारंभ कर सकते हैं।

कई बीमारियों से मिले राहत | Why Surya Namaskar is called complete Vyayam?

ब्लड प्रेशर, शुगर, चिंता, गुर्दे , हृदय रोग,नींद न आना, हांथ-पैर में फाटन उठना,
लीवर रोगों से जुड़ी बीमारी और अन्य तरह की बीमारियों से ग्रस्त लोग सूर्य नमस्कार योग का सहारा ले सकते हैं।
सेहत मंद जीवन जीने के लिए सूर्य नमस्कार सर्वोत्तम साधन है।

अंतरदृष्टि विकसित करे सूर्य नमस्कार | What are the benefits of Surya Namaskar vyayam?

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar vyayam) का नियमित अभ्यास से,
मणिपुर चक्र का आकार विकसित होने लगता है।
मणिपुर चक्र एक प्रकार का मस्तिष्क सहायक अंग भी है भी,
मणि पुर चक्र हमारी दिमागी हालत को मजबूत बनाता है।
मन की चंचलता को नियंत्रित करने में सूर्य नमस्कार सहायक साबित होता है।
हमारे मन को भटकने से रोकने व केंद्रित योग्य बनाता है।


मणिपुर चक्र का अत्यधिक कमजोर होकर सिकुड़ जाना,


नाकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलना है, और किसी भी कार्य में सकारात्मकता का अभाव साबित होता है।
ऐसी परिस्थिति पर दिल बेहद कमजोर पड़ने लगता है किसी भी कार्य में मन नहीं लगता।
जो बीमारी शरीर में नहीं भी है, दूसरों की बीमारियों को देखकर अपने ही शरीर में होने की आशंका बनी रहती है।

उपसंहार: is surya namaskar good?|complete Surya Namaskar vyayam

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar vyayam) हमारे शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखते है, इसीलिए सभी योग विशेषज्ञ सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास पर विशेष बल देते हैं। अगर प्रतिदिन सूर्य नमस्कार को आदतन स्वीकार कर लिया जाय,
तो निश्चय मानिये कि शरीर को हष्ट पुष्ट और मन को एकाग्र चित्त किया जा सकता है।
वैज्ञानिक शोधों के अनुसार भी Surya Namaskar vyayam शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता तैयार कर,
अन्य अन्य रोगों से शरीर को सुरक्षित रखने में मदद करता है।

FAQ:

Best complete yoga for good helth ?

Surya Namaskar Vyayam by hindisaphar

बच्चों जवान औरतों और व्रद्धों के लिए सूर्य नमस्कार एक संपूर्ण योगा है।
यदि ब्रह्म मुहूर्त में सूर्य नमस्कार प्रतिदिन किया जाए तो शरीर के सभी अंगों का व्यायाम हो जाता है।
और शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।
जिसके कारण अनन्य प्रकार के रोगों से शरीर अपने आप ही सुरक्षित हो जाता है।
शरीर में अनायास ही ऊर्जा का स्रोत बनने लगता है।
शरीर का खून साफ हो जाता है, विषाक्त पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाते हैं।
जिसके कारण तमाम प्रकार के रोग स्वत: ही ठीक होने लगते हैं।

क्या सूर्य नमस्कार से मोटापा को कम किया जा सकता है?

surya-namaskar-vyayam

सूर्य नमस्कार अनवरत करने वाले पुरुषों व महिलाओं के अंदर फैट की मात्रा कम होने लगती है।
सूर्य नमस्कार फैट को जलाकर ऊर्जा में परिवर्तित कर देता है।
और सुडोल शरीर बनाने में मदद करता है।
ज्यादा मोटे और थुलथुले शरीर वाले व्यक्तियों को दिन में कम से कम 2 बार सूर्य नमस्कार के 12 प्रकार के आसनों को करना चाहिए।
एक बार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में 4:30 से 5:30 के मध्य।और दूसरी बार सायं काल में गोधूलि प्रकाश बेला में। यह समय सूर्य नमस्कार के लिए बिल्कुल उपयुक्त माना गया है।
न केवल मोटापा अपितु तमाम प्रकार के रोगों से सूर्य नमस्कार हमारे शरीर की रक्षा करता है।

क्या यौन रोगों के लिए लाभदायक है सूर्य नमस्कार

surya-namaskar-vyayam by hindisaphar

सूर्य नमस्कार करने वाले व्यक्तियों महिलाओं और पुरुषों को यौन रोगों में विशेष प्रकार का फायदा होता है।
विशेषकर महिलाओं में यह ज्यादा असरदार साबित होता है।
क्योंकि सूर्य नमस्कार करने वाली महिलाओं के शरीर में इस इलास्टिसिटी पैदा होती है।
जिसके कारण सब के दौरान भी महिलाओं को कंप्यूटर का अनुभव करना पड़ता है।
माहवारी के दौरान होने वाले असहनीय पीड़ा से भी सुबह नमस्कार से बेहतर फायदा होता है।
लिकोरिया इत्यादि विभिन्न रोगों से भी महिलाओं को सूर्यनमस्कार छुटकारा दिलाता है।

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