छोटे उद्योग

small scale industries में 4 easy छोटे उद्योग आदि आते हैं। जिन्हे गृह उद्योग, कुटीर उद्योग, ग्रामीण उद्योग, लघु उद्योग आदि कहा जाता है।
जिन्हे कम लागत पर शुरू किया जा सकता है।
और सरकार भी ऐसे उद्योगों के लिए कर्ज और छूट देकर प्रोत्साहन देती है।

गृह उद्योग (small scale industries):


गृह उद्योग व्यवसाय की वह सबसे छोटी इकाई small scale industries है जो अपने ही घर में अपनी काबिलियत के अनुसार व्यक्तिगत तौर पर कम से कम पूंजी या घर में ही उपलब्ध संसासधनों का उपयोग कर व्यवसाय शुरू किए जाते हैं।

कुटीर उद्योग:


कुटीर उद्योग तो किसी एक परिवार के सदस्यों द्वारा आपसी सामंजस्य से पूर्ण या अंशकालिक तौर पर संचालित किए जाते हैं।इनमें पूंजी निवेश नाम मात्र का होता है। उत्पादन भी प्रायः हाथ द्वारा किया जाता है। परम्परागत ढंग से चलने वाली उत्पादन प्रक्रिया में वेतन भोगी श्रमिक नही होते हैं।

ग्रामीण उद्योग small scale industries:


ग्रामीण उद्योग small scale industries गांव के व्यक्तियों व ग्रामसमितियों द्वारा आपसी सहयोग से बेरोजगारी दूर करने के
उद्देश्य से संसाधनों को एकत्रित कर, सरकार, प्राइवेट संस्थानों के सहयोग से व्यवसाय शुरु करते
हैं। सहकारी संस्थानों की तर्ज पर यह इकाइयां चलती हैं।
इस प्रकार की अनेक इकाइयां व्यापक स्तर पर आयात-निर्यात भी करती हैं। ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित तथा भूमि, भवन, मशीनरी आदि में प्रति कारीगर या कार्यकर्ता 15 हजार रूपये से कम स्थिर पूंजी निवेश वाले उद्योग ग्रामोद्योग के अन्तर्गत आते है। राज्य ग्रामोद्योग बोर्ड तथा ग्रामोद्योग उद्योग इन इकाइयों की स्थापना संचालन आदि में तकनीकी एवं आर्थिक सहायता प्रदान करते है। इनकों अपने वार्षिक आदान-प्रदान के आधार पर कानून का पालन करना होता है।

लघु उद्योग:


लघु उद्योग छोटे प्रकार के वह व्यवसाय हैं,जिन्हे आम लोग अपनी सुविधा के अनुसार शुरू कर सकते हैं।
इस प्रकार के उद्योग-धंधों में मजदूरों की संख्या भी कम से कम होती है।
और तुलनात्मक रूप से वस्तुओं एवं सेवाओं का
उत्पादन बड़े पैमाने के उद्योगो से पूंजी की मात्रा, रोजगार, उत्पादन एवं व्यवस्थापन, आयात एवं निर्यात इत्यादि की दृष्टि से अलग होते हैं।
यह कुटीर उद्योगों से भी उत्पादन में मशीनरी उपकरणों, मजदूरी का कार्य कर रहे श्रमिकों एवं परिवारिक श्रमिकों के अनुपात, बाजार का क्षेत्र , तय लागत की पूंजी आदि आधारों पर
अलग होते हैं।

मुख्यतः लघु उद्योगों को तीन भागों में बांटा गया है। सूक्ष्म उद्योग, लघु उद्योग, मध्यम उद्योग

मुख्यत: लघु उद्योगों को इन भिन्न-भिन्न व्यवसायों में लगाई गई पूंजी (पैसों) के आधार पर बांटा गया है।

शूक्ष्म उद्योग क्या है?


सूक्ष्म उद्योग उसको कहा जाता है,
जिसके प्लाण्ट एवं मशीनरी उपकरणों और कच्चा माल व अन्य संसाधनों में लागत
अधिकतम 25 लाख रूपये तक लगाई गई होती है।
कम से कम कितनी भी लगाई गई हो।

लघु उद्योग क्या है?


लघु उद्योग वह होता है जहाँ पर पलांट और समस्त
मशीनरी उपकरणों, कच्चा माल व अन्य संसाधनों की कुल लागत 25 लाख रूपये से अधिक हो,
किन्तु 5 करोड़ रूपये से अधिक न हो।

मध्यम उद्योग क्या है?


मध्यम उद्योग वह है जिसमें प्लांट एवं मशीनरी और कच्चा माल व अन्य संसाधनों में निवेश 5 करोड़ रूपये से अधिक हो, लेकिन 10 करोड़ रूपये से कम हो।

छोटे उद्योग धंधों की सरल परिभाषा:


सेवा उद्योग के आकार में एक सूक्ष्म उद्योग वह है जहाँ उपकरणों में निवेश
10 लाख रूपये से आगे नहीं बढ़ता है।
और अगर बढ़ता है तो वह लघु उद्योग की श्रेणी में आ जाता है।
लघु उद्योग जहाँ कुल (लागत)निवेश 10 लाख रूपये से अधिक होता है।
लेकिन 5 करोड़ रूपये से अधिक नही होता है। और अगर व्यापार बढ़ता है तो वह मध्यम उद्योग कहलाया जाएगा।
मध्यम उद्योग जहाँं कुल लागत व व्यापार 5 करोड़
रूपये से अधिक लेकिन 10 करोड़ रूपये से कम हो।

भारत के आर्थिक विकास के क्षेत्र में लघु एवं कुटीर पैमाने के उद्योगों ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। लघु और कुटीर पैमाने के उद्योग भारत के विर्निमाण क्षेत्र की संरचना एवं स्वरूप के महत्वपूर्ण भाग हैं।

ज्यादातर लोग छोटे उद्योग-धंधों को समझने में यह एक आम प्रवृति रखते हैं कि,
गृह उद्योग,ग्रामीण उद्योग, कुटीर उद्योग तथा लघु पैमाने के उद्योगों का आशय लगभग समान होता है।
अपितु इनमें आधारभूत अन्तर हैं। जिनके कारण यह व्यक्ति, स्थान, बाजार, गुणवत्ता व लागत इत्यादि मापदण्ड के कारण अलग-अलग जगहों पर
सही बैठते हैं। और सफलता हासिल करते हैं।

मुख्यतः लघु उद्योगों में अत्याधुनिक ढंग से उत्पादन आयात-निर्यात होता है।
दैनिक श्रमिकों और स्थाई कर्मचारियों को भी रखा जाता है।
तथा काफी पूंजी निवेश भी होता है।
अपितु कतिपय कुटीर उद्योग ऐसे भी है,
जो उत्कृष्ट कलात्मकता और गुणवत्तायुक्त निर्माण व आयात-निर्यात के कारण देश-विदेश में व्यवसाय करते हैं।
अतः उन्हे लघु क्षेत्र में रखा गया था,
जिससे उन्हें भी सरकारी सुविधाएं प्राप्त होती रहे।

छोटे उद्योग धंधों का योगदान:


सूक्ष्म, लघु एंव मध्यम उद्योगों का देश की सम्पूर्ण औद्योगिक अर्थव्यस्था में एक महत्वपूर्ण योगदान है।
यह अनुमान किया जाता है कि,
मूल्य के अर्थ में एमएसएमई क्षेत्र की देश के सकल घरेलू उत्पाद में 30 प्रतिशत, औद्योगिक उत्पादन में 45 प्रतिशत और निर्यात में 48 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

रोजगार के अवसर:


कृषि क्षेत्र के व्यवसाय के बाद, (एमएसएमई) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय भी रोजगार के सबसे अधिक अवसर प्रदान करते हैं।
इस प्रकार के व्यवसाय का लाभ यह है कि इसकी
रोजगार क्षमता न्यूनतम पूंजी लागत पर है।
इस क्षेत्र में मजदूरों की संख्या वृहद् उद्योगों की
तुलना में करीब 4 गुना ज्यादा अनुमानित की गई है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिशन (लखनऊ चैप्टर) के कार्यकारी निदेशक डीएस वर्मा के अनुसार भारत की करीब 12 करोड़ लोगों की आजीविका इस क्षेत्र पर निर्भर करती है।
लघु उद्योगों की आवश्यकता इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है कि, देश की परम्परागत प्रतिभा व कला की रक्षा इसमें निहित है।
अन्य महत्वपूर्ण दृष्टिकोण से लघु उद्योग निर्यात
संवर्धन व देश को आत्म निर्भरता बनाने की ओर सफल प्रयास हैं।

सरकार द्वारा प्रोत्साहन:


ऐसे छोटे उद्योग आयात प्रतिस्थापन में सहायक हैं।
और सरकार भी अधिक से अधिक लोन देकर,
छूट भी प्रदान करती है। 17 अप्रैल 2020 को भारतीय रिजर्व बैंक ने विशेष रूप से गैर बैंकिंग
संस्थानों एवं सूक्ष्म वित्त संस्थानों को अतिरिक्त वित्त प्रदान करने के उद्देश्य से,
50,000 करोड़ रुपए के लम्बी अवधि के रेपो संचालन की विशेष व्यवस्था की घोषणा की थी।
हालाँकि पूर्व में भी 75,000 करोड़ रुपए के लम्बी अवधि का रेपो संचालित किया जा चुका है।
वे निर्यात की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। जिससे भारत सरकार भी आम जन को ऐसे व्यवसाय करने हेतु प्रोत्साहित करती है।

देश-विदेश में प्रसार:


आज के समय में लघु उद्योग small scale industries बड़े पैमाने के उद्योगों की अपेक्षा अधिक निर्यात करते हैं।
देश को आत्मनिर्भर बनाने में भी लघु उद्योग और गृह उद्योगों की बहुत आवश्यकता है।
सरकार के प्रोत्साहन और छोटे व्यवसाइयों के
अथक परिश्रम से बड़ी संख्या में अर्ध-शहरी केंद्रों के पनपने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
जिससे देश में सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्यमों को फलने-फूलने का मौका मिला है।
केंद्र सरकार की सफल ‘मेक इन इंडिया’ योजना राष्ट्रीय अभियान के रूप में की गई बेहद प्रत्यक्ष पहल है। जिससे साक्षर और शिक्षित बेरोजगारों को बहुत प्रोत्साहन व सहयोग मिला है।

लघु उद्योगों के उद्देश्य:

1. लघु उद्योगों का उद्देश्य बंधुआ मजदूरी खत्म कर मजदूरों को उचित पारिश्रमिक प्रदान करना है।
समस्त क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना है।

2. क्योंकि लघु उद्यमों के श्रम प्रधान होने के कारण उनमें विनियुक्त पूंजी की इकाई अपेक्षाकृत अधिक रोजगार कायम रखती है।

3. दूसरा मुख्य उद्देश्य आर्थिक शक्ति का समान वितरण करना है।
ताकि सभी कौशल से जुड़े लोगों को रोजगार मिल सके।

4. लघु उद्योगों small scale industries के विस्तार से बड़ी आबादी वाले देशों में औद्योगिक विक्रेन्द्रीयकरण सम्भव है।

5. इनसे देश का आर्थिक विकास प्रौद्योगिक सन्तुलन एवं क्षेत्रीय प्रौद्योगिक विषमता को कम करना सम्भव है।

6. कम पूंजी लागत वाली इकाइयां होने कारण मशीनरी का प्रयोग कम किया जाता है।
और श्रमिकों के माध्यम से कार्यविस्तार किया जाता है।
जिससे अधिक रोजगार मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

7. देश की सभ्यता एवं संस्कृति की सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी ऐसे उद्योग महत्वपूर्ण हैं।
क्योंकि इनके द्वारा कलात्मक एवं परम्परागत वस्तुओं का निमार्ण किया जाता है।

8. अधिकांशतया ये उद्योग श्रम प्रधान तकनीक पर आधारित होते है।
जिससे उद्योगों में पारस्परिक सद्भावना, सहकारिता, समानता एवं भ्रातृत्व की भावना को बल मिलता है।

9. लघु उद्योगों small scale industries का मुख्य उद्देश्य है कि वे प्राकृतिक साधनों का समुचित उपयोग करें।

10. व्यापार एवं भुगतान संतुलन को अनुकूल बनाते हुए, ये अत्यधिक विदेशी मुद्रा का अर्जन करते हैं।

11. देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हुए इनका उद्देश्य अधिक से अधिक उत्पादन करना होता है।

छोटे उद्योग-धंधों small scale industries के उदाहरण :


1. कुछ लघु उद्योगों के उदाहरण निम्न प्रकार से हैं।
2. घर में इस्तेमाल किया जाने वाला कूलर बनाना
3. एल्यूमीनियम से बने हुए सामग्री बनाना
4. हॉस्पिटल में उपयोग किए जाने वाला स्ट्रेचर बनाना
5. करंट मापने वाला मीटर या वोल्ट मीटर बनाना
6. गाड़ी में लगने वाली हेडलाइट बनाना
7. कपड़े या चमडे का बैग बनाना
8. कांटेदार तार बनाना
9. टोकरी बनाना इत्यादि
इनके अलावा भी बहुत सारे लघु उद्योग के उदहारण हो सकते हैं। इसमें एक उद्योग लघु है या नहीं इसकी जानकारी मुख्यतः उसकी लागत से तय होती है।

जागरूकता का आभाव:


पिछले काफी समय से केंद्र की मोदी सरकार छोटे उद्योग धंधों शुरू करने के लिए तेजी से प्रयास कर रही है।
जी हां, दरअसल प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत
इन बिजनेस को करने पर लोन के साथ-साथ छूट भी है।
इसका मकसद देश में उद्यमिता (entrepreneurship) को बढ़ावा देना है।
बता दें कि इस बारे में जागरूकता न होने के कारण ज्‍यादा लोग फायदा नहीं उठा पाते, ज‍बकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद लोगों से ऐसी स्‍कीम का फायदा उठाने की अपील करते रहे हैं।

ऐसे व्यवसाय small scale industries कुछ इस प्रकार से हैं, जिनकी लागत 2 से 4 लाख रुपए के बीच में है।
और पी.एम.ई.जी.पी के तहत आपको 90 % लोन मिल सकता है।
इन स्‍कीम में 30 % सब्सिडी भी दी जाती है।

small scale industries
कॉम्‍ब फाउंडेशन यूनिट / small scale industries


एक आकर्षक बिजनेस आइडिया है जिसे कॉम्‍ब फाउंडेशन यूनिट कहा जाता है। दरअसल शहद के उत्‍पादन के लिए कॉम्‍ब फाउंडेशन यूनिट का इस्‍तेमाल करना पड़ता है।

अब ऐसे में अगर आप कॉम्‍ब फाउंडेशन यूनिट लगाना चाहते हैं तो कुल लागत 3 लाख 51 हजार रुपए होगी। लेकिन इस प्रोजेक्‍ट को प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत 90% लोन मिल जाएगा। वहीं इसमें आपकी कुल सेल 4 लाख 50 हजार रुपए होगी। यानी कि आप लगभग 1 लाख रुपए कमा सकते हैं

इलेक्‍ट्रॉनिक रिपेयर यूनिट उद्योग / small scale industries


अगर आप कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाना चाहते हैं तो आप इलेक्‍ट्रॉनिक रिपेयर यूनिट भी लगा सकते हैं।

इसके लिए लगभग 12 हजार रुपए का इंतजाम करना होगा, क्‍योंकि मॉडल प्रोजेक्‍ट के मुताबिक आपको 1 लाख 2 हजार रुपए की प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट तैयार करनी होगी। बता दें कि इस प्रोजेक्‍ट के मुताबिक आपकी कमाई लगभग 1 लाख 50 हजार रुपए की सेल होगी और आप पहली बार में लगभग 48 हजार रुपए बचा सकते हैं।

आटा चक्की / small scale industries


2.40 लाख रु में प्रारंभ करें ये व्यापारआपको बता दें कि आटा चक्की भी एक कमाल का बिज़नेस है। दरअसल आटा एक ऐसी चीज है।
जिसके बिना शायद ही कोई गृहस्थी चले। ऐसे में आटा चक्की एक सदाबहार बिजनेस आइडिया है। यही कारण है कि गांवों और शहरों में पावर आटा चक्‍की की खासी डिमांड रहती है।बता दें कि अगर आप पावर चक्‍की लगाना चाहते हैं तो आपको लगभग 2 लाख 38 हजार रुपए का प्रोजेक्‍ट तैयार करना होगा।

इसमें से 90% पीएमईजीपी के तहत लोन मिल जाएगा।
मालूम हो कि एक साल में आपकी कमाई 3 लाख रुपए होगी और कॉस्‍ट ऑफ प्रोडक्‍शन हटा दें तो आपकी बचत 61 हजार रुपए से ऊपर होगी।

गास्केट सीमेंट यूनिट / small scale industries


3.44 लाख में शुरू करने योग्य गास्‍केट सीमेंट यूनिट भी एक अच्छा एवं सस्ता बिजनेस आइडिया है।
दरअसल अगर आप गास्‍केट सीमेंट यूनिट शुरू करना चाहते हैं तो,
रिपोर्ट के मुताबिक कॉस्‍ट ऑफ प्रोडक्‍शन 3 लाख 44 हजार रुपए आएगी,
इसमें वर्किंग कैपिटल, रॉ-मैटीरियल, इक्विपमेंट आदि का खर्च शामिल है।
वहीं दूसरी तरफ आप की कुल सेल्‍स 4 लाख रुपए होगी।
पहली बार में लगभग 60 हजार रुपए की बचत होगी,

फिनाइल की गोली बनाने की यूनिट / small scale industries


प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत फिनाइल की गोली बनाने का कार्य भी सफल उद्योग हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्‍ट का कॉस्‍ट ऑफ प्रोडक्शन 3 लाख 34 हजार रुपए आएगी।
जबकि कुल सेल्‍स 5 लाख रुपए होगी।
बचत 1 लाख 65 हजार रुपए होगी।
इस प्रोजेक्‍ट की निश्चित लागत 1 लाख 44 हजार होगी।
और परिवर्तनीय लागत 1 लाख 90 हजार।

small scale industries

ऐसे अनन्य छोटे उद्योग धंधों की स्थापना कर सरलता से उद्यम पंजीकरण भी कराया जा सकता है। जिसको आनलाइन माध्यम से स्वयं या जनसेवा केंद्रों पर जाकर कराया जा सकता है।
पंजीकृत छोटे उद्योग धंधों small scale industries को सफल बनाने हेतु सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय कई योजनाएं चला रहा है।