सेंधा नमक

सेंधा नमक एक प्रकार का प्राकृतिक खनिज भोज्य पदार्थ ‘व’ औसधि है। जो अनेक रंगों में पाया जाता है।

पूरे विश्व में उपयोग होने वाला यह एक प्रकार का भोज्य पदार्थ है। और एसिया महाद्वीपीय देशों के में गृह चिकित्सा में भी प्रयोग में लाया जाता है।सेंधा नमक लाहौरी नमक एक साधारण नमक का क्रिस्टल पत्थर है,
जिसमें हैलाईट (Halite) सोडियम क्लोराइड (NaCl), मिला हुआ होता है।
यह अक्सर रंगहीन या सफेद होता है, हालांकि
कभी-कभी अन्य पदार्थों की मौजूदगी से इसका रंग हल्का नीला, गाढ़ा नीला, जामुनी, गुलाबी, नारंगी, पीला या भूरा भी हो सकता है।
भारतीय भोजन और आयुर्वेद, गृह चिकित्सा में हाजमें एवं औसधि के लिए इस्तेमाल होने वाला काला नमक भी एक प्रकार का सेंधा नमक होता है। क्रिस्टल पत्थर-जैसे रूप में मिलने वाला यह एक खनिज पदार्थ है।
इसे मोटे मोटे टुकड़ों में पीसकर बाजार में बेचा जाता है । अब तो महीन पाउडर बनाकर भी बाजार में उसको उतार दिया गया है। जो परचून की दुकानों पर सभी जगह उपलब्ध होता है

सेंधा नमक भारत से कैसे गायब कर दिया गया :

भारत मे 1930 से पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था।
विदेशी कंपनियां भारत मे नमक के व्यापार मे आजादी के पहले से उतरी हुई है,
उनके कहने पर ही भारत के अँग्रेजी प्रशासन द्वारा भारत की भोली भली जनता को आयोडीन मिलाकर समुद्री नमक खिलाया जा रहा है,

हुआ ये कि जब ग्लोबलाईसेशन के बाद बहुत सी विदेशी कंपनियो (अन्नपूर्णा,कैपटन कुक ) ने नमक बेचना शुरू किया,
तब ये सारा खेल शुरू हुआ अब समझिए खेल क्या था ?

व्यसाइयों ने पैदा किया भ्रम :

विदेशी कंपनियो को नमक बेचना है और बहुत मोटा लाभ कमाना है और लूट मचानी है तो पूरे भारत मे एक नई बात फैलाई गई कि आओडीन युक्त नामक खाओ , आप सबको आयोडीन की कमी हो गई है।
ये सेहत के लिए बहुत अच्छा है आदि आदि बातें पूरे देश मे प्रायोजित ढंग से फैलाई गई।
और जो नमक किसी जमाने मे 2 से 3 रूपये किलो मे बिकता था। उसकी जगह आयोडीन नमक के नाम पर सीधा भाव पहुँच गया 8 रूपये प्रति किलो और आज तो 20 रूपये को भी पार कर गया है।

समुद्री नमक बेचने पर रोक :

दुनिया के 56 देशों ने अतिरिक्त आओडीन युक्त नमक 40 साल पहले बनाने और बेचने में रोक लगा दिया गया। अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, डेनमार्क, डेनमार्क की सरकार ने 1956 मे आयोडीन युक्त नमक बैन कर दिया।
उनकी सरकार ने कहा (1940 से 1956 तक ) आयोडीन युक्त नमक खिलाया।
अधिकांश लोग नपुंसक हो गए जनसंख्या इतनी कम हो गई कि देश के खत्म होने का खतरा आ गया।
डेनमार्क के वैज्ञानिकों के अनुसार यह समस्या लगातार आयोडीन युक्त नमक खाने से हुई थी।
और उन्होने बैन लगाया।
और शुरू के दिनो मे जब हमारे देश मे ये आयोडीन का खेल शुरू हुआ।
तब देश के तत्कालीन नेताओ ने कानून बना दिया कि बिना आयोडीन युक्त नमक भारत मे बिक नहीं सकता।
कुछ समय उपरांत सरकार के खिलाफ दायर याचिका पर न्यायालय ने ये बैन हटाया।

सेंधा नमक के फायदे:

सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप और बहुत गंभीर बीमारियों के ठीक होने की संभावना रहती है।
क्योंकि ये अम्लीय नहीं ये क्षारीय है (alkaline) क्षारीय चीज जब अम्ल मे मिलती है तो,
वो न्यूटल हो जाता है और रक्त अम्लता खत्म होते ही शरीर के अनन्य रोग ठीक हो जाते हैं ।

सेंधा नमक एक प्राकृतिक पदार्थ:

ये नमक शरीर मे पूरी तरह से घुलनशील है।
और सेंधा नमक की शुद्धता के कारण आप एक और बात से पहचान सकते हैं कि, उपवास ,व्रत मे सब सेंधा नमक ही खाते है। तो आप सोचिए जो समुद्री नमक आपके उपवास को अपवित्र कर सकता है वो आपके शरीर के लिए कैसे लाभकारी हो सकता है?

सेंधा नमक शरीर मे 97 पोषक तत्वो की कमी को पूरा करता है।
इन पोषक तत्वो की कमी ना पूरी होने के कारण ही लकवे (paralysis) का अटैक आने का सबसे बढ़ा जोखिम होता है।
सेंधा नमक के बारे में आयुर्वेद में बोला गया है कि,
यह आपको इसलिये खाना चाहिए क्योंकि सेंधा नमक वात, पित्त और कफ को दूर करता है।

सेंधा नमक पाचन क्रिया में सहायक:

यह पाचन में सहायक होता है और साथ ही इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है।
जो हृदय के लिए लाभकारी होता है। यही नहीं,
आयुर्वेदिक औषधियों में जैसे लवण भाष्कर, पाचन चूर्ण आदि में भी प्रयोग किया जाता है।

यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मदद रूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का होता है।
इससे पाचक रस बढ़ते हैं। ऋग्वेद में भी नमक खाने हेतु (सेंधव) काला नमक, प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
क्योंकि ये पृक्रति द्वारा बनाया हुआ है।

आयोडीन नमक के नुकसान:

ये जो समुद्री नमक है, आयुर्वेद के अनुसार ये तो अपने आप मे ही बहुत खतरनाक है।
क्योंकि कंपनियाँ इसमे अतिरिक्त आयोडीन मिला रही हैं।
मुख्यतः आयोडीन भी दो प्रकार का होता है एक तो पृक्रति द्वारा बनाया हुआ, जो पहले से ही नमक मे होता है।
दूसरा होता है “industrial iodine” ये बहुत नुकसान दायक भी हो सकता है।
ज्यादातर उपयोग हो रहा यह समुद्री नमक जो अनेक रोगों का कारण बनता है।
उसमे कंपनिया अतिरिक्त industrial iodine डाल कर पूरे देश को बेच रही हैं।
जिससे बहुत सी गंभीर बीमारियां लोगो में पनप रही हैं।

जरूरत से ज्यादा आयोडीन नुक्सान देह:

ये नमक मानव द्वारा कारखानों मे निर्मित होता है।

आम तौर से उपयोग मे लाया जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप (High B P),
डाइबिटीज़, आदि गंभीर बीमारियो का भी कारण बनता है ।
इसका एक कारण ये है कि ये नमक अम्लीय (acidic) होता है।
जिससे रक्त अम्लता बढ़ती है और रक्त अमलता बढ्ने से ये सब 48 रोग आते है ।
ये नमक पानी में कभी पूरी तरह नहीं घुलता हीरे की तरह चमकता रहता है।
इसी प्रकार शरीर के अंदर जाकर भी नहीं घुलता है।
और अंदर किडनी से भी नहीं निकल पाता है।
और पथरी का भी कारण बनता है।
ये नमक नपुंसकता और लकवा (paralysis ) का बहुत बड़ा कारण है।
समुद्री नमक से सिर्फ शरीर को 4 पोषक तत्व मिलते है।

नमक में मिलावट:

रिफाइण्ड नमक में 98% सोडियम क्लोराइड होती है।
शरीर इसे विजातीय पदार्थ के रुप में रखता है। यह शरीर में घुलता नही है।
इस नमक में आयोडीन को बनाये रखने के लिए Tricalcium Phosphate, Magnesium Carbonate, Sodium Alumino Silicate जैसे रसायन मिलाये जाते हैं।
जो सीमेंट बनाने में भी इस्तेमाल होते है। विज्ञान के अनुसार यह रसायन शरीर में रक्त वाहिनियों को कड़ा बनाते हैं।
जिससे रक्त के थक्के बनने की संभावना होती है।
और आक्सीजन जाने मे परेशानी होती है।
जोड़ो का दर्द और गठिया, बाई, बात आदि रोग होने का कारण हैं।
आयोडीन नमक से पानी की जरुरत ज्यादा होती है।
1 ग्राम नमक अपने से 23 गुना अधिक पानी खींचता है।
यह पानी कोशिकाओ के पानी को कम करता है। इसी कारण हमें प्यास ज्यादा लगती है।

सेंधा नमक एक आयुर्वेदिक औसधि:

पांच हजार साल पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में भी भोजन में सेंधा नमक के ही इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
भोजन में नमक व मसाले का प्रयोग भारत, नेपाल, चीन, बंगलादेश और पाकिस्तान में अधिक होता है।
आजकल बाजार में ज्यादातर समुद्री जल से तैयार नमक ही मिलता है।
जबकि 1960 के दशक में देश में लाहौरी नमक मिलता था।
यहां तक कि राशन की दुकानों पर भी इसी नमक का वितरण किया जाता था।

सेंधा नमक बेहतर:


स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता था।
समुद्री नमक के बजाय सेंधा नमक का प्रयोग होना चाहिए।
इस अतिरिक्त आयोडीन युक्त समुद्री नमक खाने की जगह सेंधा नमक खाने की आदत डालना चाहिए।
सिर्फ आयोडीन के कारण समुद्री नमक खाना समझदारी नहीं है।
क्योंकि आयोडीन हर नमक मे होता है।
सेंधा नमक मे भी आयोडीन होता है। बस फर्क इतना है कि,
इस सेंधा नमक मे प्राकृतिक रूप से बनाया गया आयोडीन होता है।
जो आसानी से शरीर को स्वीकार्य और पर्याप्त होता है।
हरी सब्जियों,आलू, अरवी से भी आयोडीन मिल जाता है।
इसलिए सेंधा नमक स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।