दुष्कर्म

कलयुग की कालिख ने इस कदर समाज को किया दूषित कि बाप ने नाबालिक बेटी से दुष्कर्म कर बच्चा पैदा करने पर मजबूर कर दिया।

बाप ने अपने ही बेटी से किया दुष्कर्म


हवस का पुजारी 28 सप्ताह तक नाबालिग बेटी से जबरन बलात्कार करता रहा।
बच्ची ने जब भी मुंह खोलना चाहा जान से मारने की धमकी देकर कर देता था शांत।
पीड़िता के गर्भवती होने पर उसकी मां को पता चला। इसके बाद मुकदमा दर्ज कराया गया। अदालत ने दुष्कर्मी को आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है।

एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी को हवस का शिकार बनाया। सात महीने तक उसका यौन शोषण किया। बेटी डरी-सहमी मजबूर बाप की मर्दानगी सहती रही। जब मां ने बेटी का गर्भ देखा तो उसने पूछताछ की। आखिरकार बेटी मां के गले में लिपटकर फूट-फूटकर रोई और अपने राक्षस तुल्य पिता की काली करतूत को बता दिया।

मां की ममता के सामने फीका पड़ा सिंदूर

बाप के दुष्कर्म की सजा देने के लिए मां ने काली रुप धारण कर बेटी का साथ दिया और फैसला लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह अपने पति को सजा जरूर दिलवाएगी। लाख जतन कर मां बेटी को कानून ने न्याय तो दिया और पीड़िता को बदला भी मिला, लेकिन बेटी को एक ऐसा दंश मिला जिसकी कल्पना करने से ही रूह कांप जाती है। उसे अपने पिता के बच्चे को जन्म देने पर विवश होना पड़ा।

अबला बनी काली

जब इस कलयुग की सत्य घटना की रिपोर्ट 4 मई 2019 को मथुरा के थाना गोविंदनगर में दर्ज कराई गई थी। उस समय सुनने वालों के मुंह पीले पड़ गये। इस मामले में सोमवार को अदालत ने नाबालिग बेटी के साथ मुंह काला करने वाले पिता को आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई। उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। इस निर्णय को सुनकर भी बेटी के चेहरे पर मुष्कान नहीं थी।

क्योंकि बेटी के मन में यह बात घर कर गयी थी। कि दुष्कर्म किया बाप ने पर जीवन भर सजा भुक्तेगी बेटी।

नाबालिग को बाप ने किया गर्भवती

थाना गोविंद नगर क्षेत्र की एक कॉलोनी में मजदूर परिवार में यह घटना घटी थी।
मजदूर पिता ने अपनी 15 साल की नाबालिग बेटी से शारीरिक भूूंख मिटाई।
उसने सात महीने में कई बार इस शर्मनाक वारदात को अंजाम दिया।
जब बेटी गर्भवती हो गई और बेटी का गर्भ दिखने पर उसकी मां को घटना का पता चला।
तो मां ने अपने पति को उसकी जगह नर्क भेजने की धमकी देकर कानून का दरवाजा खटखटाया।

नहीं हो सका गर्भपात

मां ने कानून से स्वीक्रति लेकर गर्भ पतन करवाने का निर्णय लिया।
डॉक्टरों ने कहा था- अब नहीं हो सकता गर्भपात
जब दुष्कर्म का मामला संज्ञान में आया तब तक बहुत देर हो चुकी थी। न्यायालय के आदेश पर पुत्री का गर्भपात कराने के लिए सीएमओ के निर्देशन में टीम का गठन किया गया। टीम ने न्यायालय को रिपोर्ट दी थी कि यदि गर्भपात कराया गया तो बेटी के जीवन को खतरा हो सकता है।

मजबूर और जिल्लत में डूबी हुयी पीड़ित पुत्री ने दुष्कर्मी पिता के बच्चे को जन्म दिया।
एडीजीसी सुभाष चतुर्वेदी ने बताया कि,
जब मामला संज्ञान में आया तो उस समय 28 सप्ताह छह दिन का गर्भ था।
इसके कारण पीड़िता का गर्भपात नहीं हो सका। उसे बच्चे को जन्म देना पड़ा।

पति के के खिलाफ जंग

उस राक्षस के खिलाफ शिकायत करने पर पुलिस ने सख्त कार्यवाही कर जेल तो भिजवा दिया।

परंतु बलात्कार के मामले में आरोपी पति को जेल भिजवाने के बाद पूरी जिम्मेदारी पीड़िता की मां पर थी।
दैनिक मजदूरी करती थी मां।
लेकिन वह अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए चट्टान की तरफ खड़ी रही।
तमाम रिस्तेदारों और पड़ोसियों के दबावों को उसने नाबालिग बेटी का दिया साथ।

बलात्कारी बाप के खिलाफ बच्ची को मिला न्याय

मां का बस एक ही जवाब रहता था कि,
ऐसे दुराचारी बाप को ऐसी सजा मिले, ताकि लोग सबक ले सकें।
अपर सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश पॉक्सो-2

जहेंद्र पाल सिंह ने नम आखों से पीड़िता के दोषी पिता को आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई।
और बेटी को सबकुछ भूलकर नया जीवन जीने की सलाह दी।

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