राजापुर चित्रकूट

हनुमान चालीसा की उत्पत्ति का राज राजापुर चित्रकूट के संत तुलसीदास और बादसाह अकबर के साथ घटित अप्रतिम घटना से जुड़ी हुई है।

कलयुग में हनुमान


प्रभु श्री राम ने लोगों से कहा भी था कि कलयुग में भी हनुमान सशरीर विराजमान रहकर लोगों की मदद करते रहेंगे।

पवन पुत्र हनुमान हिंदुओं के आराध्य देवता है।

हनुमान चालीसा की उत्पत्ति

और सभी लोग संकट में उनको हमेशा याद करते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ भी करते है।

पर इसकी उत्पत्ति कहा और कैसे हुई यह जानकारी बहुत ही कम लोगो को होगी।
बात 1600 ईसबी की है।

तुलसी दास और अकबर की भिडंत

यह काल अकबर और राजापुर चित्रकूट के महान संत गोस्वामी तुलसीदास जी का समय काल था।
एक बार तुलसीदास जी देश भ्रमण में निकले।

रात्रि होने से पहले उन्होंने अपना पडाव आगरा में डाला, लोगो को पता लगा की तुलसी दास जी आगरा में पधारे है।

यह सुन कर उनके दर्शनों के लिए लोगो का ताँता लग गया।

जब यह बात बादशाह अकबर को पता लगी तो उन्होंने वीरबल से पुंछा की यह तुलसीदास कौन हैं?


तब वीरबल ने तुलसी दास के बारे में बताया,कि यह चित्रकूट के एक महान संत हैं।

इन्होने हिन्दुओं के ईष्ट प्रभु श्री राम के जीवन चरित्र को अवधी भाषा में एक महाकाव्य रामचरितमानस में सजीव चित्रण किया है।

यह राम के अनन्य भक्त तुलसीदास जी हैं।

भारत के समस्त हिंदू तुलसीदास जी के दर्शन करने को आतुर रहते हैं मैं भी इनके दर्शन करके आया हूँ।

अकबर ने प्रभु श्रीराम के बारे में बहुत कुछ पहले से सुन रखा था।

इसलिए रामचरितमानस के बारे में संपूर्ण वृतांत सुनकर तुलसीदास से मिलने की की इच्छा व्यक्त की।

और आदेश दिया कि तुलसीदास को तुरंत पकड़ कर मेरे सामने पेश किया जाए।
बादशाह अकबर ने अपने सिपाहियो की एक टुकड़ी को तुलसीदास जी के पास भेजा,

और तुलसीदास जी को बादशाह का पैगाम सुनाया,

निडर तुलसी दास

कि आप लाल किले में हाजिर हों। यह पैगाम सुन कर तुलसीदास जी ने कहा की मैं भगवान श्रीराम का भक्त हूँ। बादशाह और लाल किले से मुझे क्या लेना देना है।

और लाल किले में जाने से साफ मना कर दिया। जब यह बात बादशाह अकबर तक उसके सैनिकों ने पहुंचाया।

अकबर यह बात सुनते ही आग बबूला हो गया। और उन्होंने तुलसीदास जी को जंज़ीरों से जकड़वा कर लाल किला लाने का आदेश दिया।

भगवान का करिश्मा

जब तुलसीदास जी जंजीरों से जकड़े लाल किला पहुंचे तो अकबर ने कहा की अगर तुम कोई करिश्मा दिखा सको तो मैं तुम्हें छोड़ दूंगा।

तुलसी दास ने कहा मैं तो सिर्फ भगवान श्रीराम जी का भक्त हूँ।कोई जादूगर नही हूँ ।

जो आपको कोई करिश्मा दिखा सकूँ। और करिश्मा दिखाना सिर्फ मेरे प्रभु का काम है मेरा नहीं।

अकबर ने यह सुनते ही आदेश दिया की इनको जंजीरों से जकड़ कर काल कोठरी में डाल दिया जाये।

लालकिले पर बंदरों का हमला


दूसरे दिन अचानक इसी आगरा के लाल किले पर लाखो बंदरो ने एक साथ हमला बोल दिया पूरा किला तहस नहस कर डाला। लाल किले में हाहाकार मच गया।

तब अकबर ने वीरबल को बुला कर पूंछा कि वीरबल यह क्या हो रहा है? इतने सारे बंदर अचानक कैसे आ गए?
वीरबल ने कहा कि हुजूर आप करिश्मा देखना चाहते थे तो देखिये।
अकबर ने तुरंत तुलसी दास जी को कल कोठरी से निकल वाया। और जंजीरे खोल दी गई।


तुलसीदास जी ने वीरबल से कहा मुझे निरपराध को सजा मिली है।
मैने काल कोठरी में भगवान श्रीराम और हनुमान जी का स्मरण किया।

और कहा कि मैंने तो सिर्फ अपने आप को बाहर निकालने के लिए रोते हुए अपने प्रभु ईष्ट से विनती की है।

हनुमान चालीसा की उत्पत्ति

और अचानक मेरे हाथ अपने आप कुछ लिखने लगे। यह 40 चौपाई, हनुमान जी की प्रेरणा से तुलसीदास के द्वारा लिखी गई थीं।
जो भी व्यक्ति कष्ट में या संकट में होगा और इसका पाठ करेगा ,उसके कष्ट और सारे संकट दूर होंगे।

इसको हनुमान चालीसा के नाम से जाना जायेगा।
अकबर बहुत लज्जित हुए और तुलसीदास जी से माफी मांगी और पूरी इज्जत और पूरी हिफाजत,लाव लश्कर के साथ मथुरा भिजवाया।
आज हनुमान चालीसा का पाठ सभी लोग कर रहे हैं। और हनुमान जी की कृपा उन सभी पर हो रही है।

और सभी के संकट दूर हो रहे है। हनुमान जी को इसीलिए “संकट मोचन” भी कहा जाता है।

राजापुर चित्रकूट में जन्मे तुलसी दास के साथ घटित एक दैवीय घटना है।

जिसने लोगो को हनुमान चालीसा के रूप में संकट हरण का माध्यम प्रदान किया है।