गेहूँ विक्रय हेतु किसानों को हो रही समस्यायें

गेहूँ विक्रय हेतु जरूरी तथ्य –

उत्तर प्रदेश सरकार ने सहकारी समितियों में गेहूँ खरीद केंद्र 1/04/2021 को स्थापित करवाए जो 15/06/2021तक संचालित किए जाएंगे। जनसेवा केंद्रों के माध्यम से किसान पंजीकरण करवाकर समितियों में गेहूँ बेंच सकते हैं। पंजीकरण करवाने हेतु किसान अपना आधार कार्ड, बैंक खाते की पासबुक और अपनी जोतंत जमीन की इंतखाब (खतौनी) साथ में लेकर जाएं।

गेहूँ बेचने के पश्चात पैसे मिलने के नियम –

खरीद केंद्र में गेहूँ बेचने के पश्चात केंद्र प्रभारी द्वारा किसान को पावती रसीद प्रदान किया जाएगा। और प्रतिदिन खरीदे गए गेहूँ को संबंधित पोर्टल पर दर्ज करवांगे। तत्पश्चात खाद्य विपड़न अधिकारी की जिम्मेदारी पर पैसे किसानों के खातों पर भेजे जाएंगे।

गेहूँ विकृय में आने वाली समस्यायें –

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कोरोना महामारी के चलते समस्त आला अधिकारियों और गेहूँ उठाने वाले ठेकेदारों द्वारा लापरवाही बरती जा रही है, खरीद केंद्र प्रभारी द्वारा तौला जा चुका गेहूँ उठाया नहीं जा रहा सभी गोदामें भर चुकी हैं। किसान हफ्तों कतार में ट्रैक्टर,बैलगाडी़ लगाकर भूंखे मर रहे हैं। परंतु चिले के अधिकारी जनता के अधिकारों पर कुंडली मार कर बैठे हैं। किसान वर्ष भर धूप में खेती कर अनाज तो पैदा कर लेता है। और सासन स्तर से व्यस्थापन हेतु उपयुक्त प्रबन्ध के प्रयास भी किए जाते हैं। परंतु अधिकारियों और कर्मचारियों की भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते देश की अर्थव्यवस्था गर्त में समाती जा रही है।

मामला शिवरामपुर क्षेत्रीय सहकारी समिति शिवरामपुर गेहूँ खरीद केंद्र का है जहां पर समस्त गोदामें भर चुकी हैं। और क्षेत्रीय किसानों नें जुहूम लगा रखा है। एक तरफ कोरोना की मार और बेरोजगारी दूसरी तरफ कर्ज भरने का दबाव बावजूद इसके गेहूँ नहीं बिक रहा। अधिकारी मिलते नहीं, फोन उठाते नहीं।आखिर कब जय जवान, जय किसान के नारे को वास्तविकता प्रदान होगी। कब पढे़ लिखे अधिकारियों और ठेकेदारों का जमीर जागेगा।कब भ्रष्टाचार को सरकारें मुद्दा बनाएंगी। कब किसान, मजदूर खुशहाल होगा। क्या इसी तरह सोसल मीडिया में सफेद पोसों द्वारा मात्र एक लंच पैकेट को 15-20 व्यक्तियों द्वारा वितरण का ढोंग दिखाकर झूंठी फोटो में राजनीति और समाजवाद को मलिन किया जाएगा। बेईमानी के पैसों से महगे कपड़ों और महगी गाडियों के पीछे का सच कभी उजागर होगा।

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